बंद फैक्ट्रियां में खुल सकेंगे वेयरहाउस

बंद फैक्ट्रियां में खुल सकेंगे वेयरहाउस

भोपाल। प्रदेश के मुख्यमंत्री कमल नाथ अपनी पहली ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट से पहले उद्योगपतियों को बड़ी सुविधाएं देने जा रहे हैं। मध्यप्रदेश को देश का लॉजिस्टिक हब बनाने के लिए सरकार बंद पड़े प्रोजेक्ट, फैक्टरी की जमीन पर वेयर हाउस बनाने की मंजूरी देगी। संबंधित भू-स्वामी एक सामान्य शुल्क देकर जमीन का उपयोग वेयर हाउस के रूप में कर सकेंगे। इससे मप्र को एक बड़े लॉजिस्टिक हब के रूप में बदला जा सकेगा। इस बदलाव के बाद विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों के अलावा अन्य स्थानों पर उद्योग केंद्रों से ली गई जमीन पर किसी निवेशक का प्रोजेक्ट यदि सफल नहीं हुआ है तो वह इसे वेयर हाउस में तब्दील कर सकेगा। इस संबंध में प्रस्तावित नीति को 15 अक्टूबर को आने वाली कैबिनेट में रखा जा सकेगा। इसमें कंपनियों के मर्जर और डिमर्जर को लेकर बदलाव किया जाएगा। असल में सरकार को उम्मीद है कि मध्यप्रदेश में लॉजिस्टिक हब बनने की पर्याप्त क्षमता है। समिट से पहल ही सरकार को लॉजिस्टिक हब के 34 प्रस्ताव मिल चुके हैं। इसके तहत ये निवेशक करीब 12 हजार करोड़ रुपए के निवेश करने के इच्छुक है। इस क्षेत्र की संभावनाआें को देखते हुए कमलनाथ सरकार उद्योग नीति में सरकार एक अन्य बड़ा बदलाव करने जा रही है। यह बदलाव कंपनियों के मर्जर और डिमर्जर को लेकर हो रहा है। मौजदा नीति के अनुसार यदि किसी कंपनी को अन्य कंपनी अधिग्रहित करती थी, तब नामांतरण शुल्क लगता है, जो कंपनियों को काफी भारी पड़ता था, लेकिन अब यह प्रावधान किया जा रहा है कि मात्र दस हजार रुपए के शुल्क पर मर्जर, डिमर्जर का काम किया जा सकेगा। इससे जो कंपनियां संकट में आने के चलते बंद होने की कगार पर आती हैं, उन्हें अन्य बड़ी कंपनियां आसानी से टेकओवर कर सकेंगी। इससे कंपनियों के बंद होने और रोजगार के छंटने का संकट कम होगा। इसके अलावा पीथमपुर में सेक्टर 5 व 6 निर्माण के लिए करीब 8 हजार एकड़ जगह लेने की तैयारी की जा रही है। यह भूमि लैंड पूल नीति के तहत ली जाएगी, जिसमें जमीन देने वालों को कुछ हिस्से में दूसरे निर्माण का अधिकार मिलेगा।

आधी कीमत में मिलेगी जमीन

औद्योगिक नीति में एक बड़ा बदलाव प्रोजेक्ट को मिलने वाली जमीन की कीमत को लेकर हो रहा है। अभी तक 20 हेक्टेयर से अधिक जमीन लेने पर यानी बड़े प्रोजेक्ट के लिए जमीन की पूरी कीमत देना होती है, वहीं इससे कम जमीन पर अलग- अलग तरह की छूट मिलती है। इसे अब सरलीकरण करते हुए सरकार प्रावधान कर रही है कि बड़े प्रोजेक्ट के लिए जमीन लेने पर इसकी आधी कीमत लगेगी, वहीं एक हेक्टेयर से कम जमीन के लिए यह छूट 75 फीसदी तक होगी।