बहादुरा के लड्डुओं का स्वाद अटल, धर्मेंद्र जैसी हस्तियों की जुबान पर चढ़ा

बहादुरा के लड्डुओं का स्वाद अटल, धर्मेंद्र जैसी हस्तियों की जुबान पर चढ़ा

ग्वालियर। खान-पान के ठिकानों पर नजर डालें तो अगर राजनीतिक और फिल्मी हस्तियां ग्वालियर आएं और बहादुरा स्वीट्स के बूंदी के लड्डू उनकी जुबान पर न जाएं ऐसा हो नहीं सकता। भिंड- मुरैना का प्रसिद्ध देशी घी, डबल रिफाइंड शक्कर और राजधानी ब्रांड के बेसन ने लड्डुओं की जुबान पर जाते ही घुलन और मिठास में चार चांद लगाए हैं। बात सिंधिया रियासत के समय की है जब बहादुर प्रसाद शर्मा ने वर्ष 1930 में घर में लड्डू बनाकर खोमचा लगाना शुरू किया था। तब जिसने एक बार इन लड्डुओं को चखा उसकी जुबान पर लड्डू का स्वाद चढ़ गया। इन लड्डुओं का ठिकाना कई बार बदला और अब नया बाजार में बाहर बदरंग सा साइन बोर्ड टंगा है लेकन अंदर बूंदी की छनक जीभ पर मिठास घोल देती है। दुकान संचालक विकास शर्मा बताते हैं कि प्रदेश सरकार और दिल्ली के प्रगति मैदान पर लगने वाले मेले के लिए भी कई बार आॅफर आया है।

लड्डू से कभी परहेज नहीं कर पाए अटल जी

पूर्व पीएम स्व. अटल बिहारी वाजपेयी खान-पान के शौकीन रहे हैं। उन्हें इन लड्डुओं की तासीर भी पता थी इसलिए दिल्ली पहुंचने के बाद भी वे इनका स्वाद नहीं भुला पाए। दिल्ली तक लड्डू ले जाने का काम सालों साल उनके भांजे अनूप मिश्रा ने किया है। बालीवुड स्टार धर्मेन्द्र के पास तक लड्डू ले जाने का काम दुकान मालिक विकास शर्मा के बड़े भाई ने किया है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी इन लड्डुओं के मुरीद हैं। दिवगंत नेता सुषमा स्वराज की भी पसंद यह लड्डू रहे हैं।

शुद्ध देशी घी और ब्रांडेड बेसन का कमाल

दुकान संचालक विकास शर्मा कहते हैं कि यह सबकुछ शुद्ध देशी घी और ब्रांडेड बेसन का कमाल है। विकास कहते हैं कि घी हम भिंड-मुरैना से मंगाते हैं और बेसन राजधानी ब्रांड का उपयोग करते हैं। धामसर (यूपी) से डबल रिफाइंड शक्कर मंगाते हैं। धामसर की शक्कर काफी नामचीन है। लड्डुओं का यह कारोबार पहले बहादुर प्रसाद शर्मा ने किया और अब उनके तीन बेटे भी यही कर रहे हैं। दुकान से रोजाना 50 किलो से ज्यादा लड्डुओं की खपत हो जाती है और भाव भी 500 रुपए किलो चल रहा है।