रिलायंस कर सकती है रिन्युअल एनर्जी में निवेश, ‘जियो किसान’ प्रोजेक्ट की भी तैयारी

रिलायंस कर सकती है रिन्युअल एनर्जी में निवेश, ‘जियो किसान’ प्रोजेक्ट की भी तैयारी

इंदौर ।    18 अक्टूबर को होने वाली इन्वेस्टर्स समिट ‘मैग्निफिसेंट एमपी’ में कमलनाथ सरकार के नाम बड़ी उपलब्धि जुड़ने की संभावना है। पुष्ट सूत्रों की खबर है कि देश के प्रसिद्ध उद्योगपति मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज प्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों में निवेश कर सकती है। उम्मीद की जा रही है कि रिन्युअल एनर्जी में रिलायंस कोल बेड मीथेन की संभावनाओं के लिए काम कर सकती है। इसके अलावा कृषि की बात करें तो एग्रीकल्चर सेक्टर में अपने पायलट प्रोजक्ट ‘जियो किसान’ को लॉन्च करने की औपचारिक घोषणा कर सकती है। उद्यानिकी विभाग इससे संबंधित विषयों पर काम कर रहा है। इस प्रोजेक्ट के तहत किसानों को उपज बिक्री, मंडियों के भाव आदि के बारे में जानकारी मिल सकेगी। हालांकि प्रदेश के अफसर अभी इस बारे में ज्यादा बताने में खुद को असमर्थ बता रहे हैं।

‘सुरक्षित मप्र’ पर भी चर्चा

उद्योगों के निवेश के लिए मप्र सरकार सुरक्षा को लेकर पूरे प्रदेश में सुरक्षित मप्र अभियान चलाएगी। इसके साथ ही भोपाल के पास लॉजिस्टिक हब बनाने पर भी सहमति बन गई है। डाटा सेंटर के लिए भी वित्तीय सहायताओं की मंजूरी हो गई है। कम्युनिकेशन टॉवर्स के लिए वन विभाग से बात की जा रही है। क्या है कोल बेड मीथेन : कोल बेड मीथेन (सीबीएम) पॉवर प्लांट के लिए एक आदर्श ईंधन है। उच्च ज्वलन क्षमता के कारण सीमेंट प्लांट, रोलिंग मिल एवं रिफ्रेक्ट्ररीज के ईंधन के रूप में भी इसका उपयोग सम्भावित है। जानकार बताते हैं कि सीबीएम के दोहन से प्राकृतिक गैस की उपलब्धता बढ़ेगी।

हर उद्योग के लिए होगी अलग नीति : मोहंती

मुख्य सचिव सुधिरंजन मोहंती ने बुधवार को इंदौर में पत्रकारों को बताया कि मध्यप्रदेश शासन अपनी औद्योगिक नीति में बदलाव करेगा और यह बदलाव मैग्निफिसेंट एमपी के एक दिन पहले देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह एक ही जूता सभी के पैर के लिए फिट नहीं होता, वैसे ही एक नीति अलग-अलग उद्योगों के लिए नहीं हो सकती। हीरे की खदान के लिए अलग जरूरतें होती हैं तो अन्य उद्योग के लिए अलग। इसलिए 9-10 अलग विभागों की नीतियां बनाई जाएंगी। मुख्य सचिव ने मैग्निफिसेंट एमपी के कोर सेक्टर्स के बारे में बताया कि जीएसटी कानून बनने के बाद मप्र में वेयरहासिंग, लॉजिस्टिक सेंटर की संभावनाएं बढ़ी हैं। एग्रो प्रोसेसिंग में बड़ा स्कोप है। पर्यटन का पर्याप्त दोहन अभी किया जाना है, फार्मा यूनिट्स बढ़ाना चाहते हैं। रिन्युअल एनर्जी, एफएमसीजी के लिए भी अनेक संभावनाएं हैं।