काश! हमको राफेल पांच साल पहले मिले होेते.

काश! हमको राफेल पांच साल पहले मिले होेते.

भोपाल ।    भारतीय वायु सीमाओं की रक्षा में जिंदगी दांव पर लगाने वाले इंडियन एयर फोर्स के जांबाज अफसर जहां इस बात पर खुश हैं कि अत्याधुनिक फाइटर प्लेन भारत को दशहरा पर मिलने के साथ ही एयर डिफें स का नया अध्याय शुरू हो जाएगा। वहीं मलाल भी है कि अगर विवादों के कारण राफेल के आने में देरी नहीं हुई होती, तो सीमाओं की सुरक्षा के साथ ही सीमा पार आतंक विरोधी कार्रवाइयों में ज्यादा धार होती। पीपुल्स समाचार ने राफेल के भारत को मिलने पर वायु सेना के सीनियर अधिकारियों से राय जानी। पढ़िए जो उन्होंने कहा...

‘तो बालाकोट के बाद एफ-16 लौट नहीं पाते और इमरान भी अमेरिका जाने लायक नहीं रह पाते’

-आदित्य विक्रम पैठिया, रि. एयर वाइस मार्शल (वीर चक्र,1971 भारत-पाकिस्तान युद्ध के वॉर हीरो) हम अभी भी 63 के मिग उड़ा रहे हैं, जिसके मुकाबले राफेल फिμथ जनरेशन का फाइटर्स हैं। इसके राडार और मिसाइल सिस्टम बेहद अपडेट हैं, जोकि 160 किमी रेंज तक मार करने वाले हैं। रफाल से हमारी एयरफोर्स की मारक क्षमता इतनी बढ़ जाएगी कि हमको एशिया में कोई आंखें दिखाने की जुर्रत नहीं कर सकेगा। यह फाइटर देश की सीमाओं के अंदर रहते हुए और एक्रास बॉर्डर सटीक अटैक करेगा, जिससे किसी भी हालत में दुश्मन बच नहीं सकेगा। वैसे भी यह राफेल तो हमको पांच साल पहले ही मिल जाना चाहिए था और अगर ऐसा हो गया होता तो फिर बालाकोट स्ट्राइक के बाद काउंटर अटैक करने वाले पाकिस्तान के एफ-16 में से आधे भी वापस लौट कर नहीं जा पाते। मैंने तो यूएसए जाकर एफ-15 भी उड़ाया है, तो मेरा मानना है कि राफेल होने से इतना नुकसान होता कि इमरान खान भी अमेरिका जाने लायक नहीं रहते।

जबर्दस्त मारक क्षमता, किसी भी दिशा में टर्न लेने के अद्वितीय कौशल से राफेल बदलेगा तस्वीर’

-प्रमोद कुमार श्रीवास्तव, रि. एयर वाइस मार्शल (एवीएसएम) राफेल की मैनुवरिगं स्पीड और बैलेंस इतना ज्यादा अपग्रेड है कि पलक झपकते ही अपनी स्थिति चारों दिशाओं में बदल कर स्पीड बनाए रखते हुए μलाइ कर सकता है। इसका सबसे अच्छा फायदा अटैक और बॉम्बिंग के दौरान मिलेगा। इस फाइटर के राडार और वैपन सिस्टम अत्याधुनिक होने से भारत की अपनी मिसाइलें भी ले जा सकेगा। यह दुश्मन देश के एयर और जमीनी राडार को चकमा देने के साथ ही सटीकता से अत्यधिक तेजी से हमला करने में समक्ष है। इसके कॉकपिट में सारे कमांड अब ग्लास पर कंप्यूटराइज्ड होंगे, जिससे पायलट को बेहद आसानी होने के साथ ही एक्युरेट मैपिंग मिलेगी। इसके पहले के विमानों में कॉकपिट में घडियों वाला सिस्टम रहता था। यह हवा से हवा और हवा से जमीन पर सटीक प्रहार करने में सक्षम है, जिससे अटैक और बॉम्बिंग में भी बेहद कारगर साबित होगा। इससे डिफेंस लाइन पर दबाव भी कम होगा।