आदिवासियों के देवस्थान सहेजने सरकार ने मांगी जमीन

आदिवासियों के देवस्थान सहेजने सरकार ने मांगी जमीन

भोपाल। राज्य सरकार प्रदेश के आदिवासियों की संस्कृति और परंपराओं को सहजने रखने के साथ ही उनके देवस्थान के संरक्षण और सामाजिक भवनों को विकसित करने जा रही हैं। सरकारी सहयोग और उचित रखरखाव के अभाव में इन देवस्थान की हालात ठीक नहीं है। सरकार ने पिछले दिनों कैबिनेट की बैठक में इन देवस्थान को विकसित करने की सुध ली और इससे संबंधित योजना को हरी झंडी भी दी थी। सरकार ने प्रदेश में आदिवासी संस्कृति के देवस्थान और सामाजिक कार्यों के लिए सामुदायिक भवन बड़े पैमाने पर बनाए जाने का निर्णय लिया था। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद प्रदेश के आदिम जाति कल्याण विभाग ने निर्माण कार्य के लिए जमीन की तलाश शुरू कर दी है। आदिम जाति कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव विभाग दीपाली रस्तोगी ने 22 जिलों के कलेक्टरों को एक हजार से लेकर चार हजार वर्गमीटर तक जमीन उपलब्ध कराने के लिए कहा है। सरकार ने देवस्थान और सामुदायिक भवन बनाने के लिए 40 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा है। आदिवासी संस्कृति को सहेजने के लिए कमलनाथ सरकार ने मई 2019 में योजना को मंजूरी दी है। सरकार के फैसले के मुताबिक गौंड, कोरकू, मवासी, भील जनजाति के ऐसे पारंपरिक स्थान जो आदिवासी बस्तियों, टोलों, मोहल्लों में हैं, उनका निर्माण एवं जीर्णोद्धार करके संरक्षण किया जाना है। संभाग, जिला और विकासखंड स्तर पर सामुदायिक भवन और देवस्थान भवन बनाए जाएंगे।विभागीय योजना के मुताबिक, आदिवासी देवस्थान का आकार संभाग, जिला और विकासखंड स्तर पर अलग-अलग होगा। संभाग स्तर पर चार हजार, जिला स्तर पर दो हजार और विकासखंड स्तर पर एक हजार वर्गमीटर जमीन पर भवन बनाए जाएंगे।

इन जिलों में होगा देवस्थानों का संरक्षण

जबलपुर, ग्वालियर, शहडोल, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, दतिया, उमरिया, डिंडौरी, छिंदवाड़ा, मंडला, बालाघाट, श्योपुर, मुरैना, भिंड, अनूपपुर, बैतूल, हरदा, खंडवा, झाबुआ, रतलाम और बड़वानी जिले में देवस्थानों का संरक्षण किया जाएगा।