चंदेरी, महेश्वर की साड़ी वाला मध्यप्रदेश लुभाएगा निवेशकों को

चंदेरी, महेश्वर की साड़ी वाला मध्यप्रदेश लुभाएगा निवेशकों को

भोपाल   चंदेरी और महेश्वर की साड़ियों से दुनिया भर में प्रसिद्ध मध्यप्रदेश के टैक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए अब नई संभावनाओं के द्वार खुलने की संभावना है। असल में इंदौर में 18 अक्टूबर को होने जा रही ग्लोबल समिट मैग्नीफिसेंट में शिरकत करने वाले देश-दुनिया के निवेशकों को मध्यप्रदेश के टैक्सटाइल इंडस्ट्री में निवेश करने के फायदे गिनाए जाएंगे। कमल नाथ सरकार का मानना है कि मप्र में वस्त्र उद्योग अपार संभावनाओं से भरा है। ऐसे में इस क्षेत्र में होने वाला निवेश बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करेगा। मध्यप्रदेश के कपड़ा एवं वस्त्र उद्योग के लिए सबसे बड़ी सुविधा यह है कि उसे कपास उत्पादन से लेकर वस्त्र तैयार करने तक किसी बाहरी उपक्रम की बाट नहीं जोहनी पड़ती। कच्चे माल की उपलब्धता, बेहतरीन सुविधाओं, अहम बुनियादी ढांचे, कुशल श्रमिकों और सरकार की ओर से मिल रहे प्रोत्साहन के कारण प्रदेश में कपड़ा एवं वस्त्र उद्योग के फलने-फूलने का माहौल तैयार है। गौरतलब है कि सरकार बनने के तत्काल बाद सीएम ने चार संभागों में टैक्सटाइल और गारमेंट पार्क बनाने की घोषणा की। ये पार्क होशंगाबाद के मोहना औद्योगिक क्षेत्र, भोपाल संभाग के अचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र, जबलपुर संभाग के छिंदवाड़ा जिले में लहगडुआ औद्योगिक क्षेत्र और उज्जैन संभाग के रतलाम जिले के जावरा औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित किए जाने हैं।

संजीवनी का काम करेगी

प्रदेश से बहुत बड़े पैमाने पर होने वाले यार्न के निर्यात में कुछ समय में गिरावट देखने को मिल रही है। सरकार का प्रयास इस क्षेत्र की बाधाओं को दूर कर यार्न निर्यात को दोबारा नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने का है। बहुत बड़ी संख्या ऐसे कारीगरों की भी है जो पारंपरिक रूप से हैंडलूम, ब्लॉक प्रिंटिंग आदि पेशे से जुड़े रहे लेकिन बाद में उचित प्रोत्साहन के अभाव में दूरी बना ली। सीएम कमलनाथ के संसदीय क्षेत्र छिंदवाड़ा में इसका एक सफल उदाहरण आशा (एड एण्ड सर्वाइवल आफ हैंडीक्राμट आर्टीजन) के रूप में देखने को मिलता है।

निवेशकों को मिलेगी कई तरह की सब्सिडी

कमलनाथ सरकार ने टैक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए कई सुविधाएं देने की घोषणा की है। टैक्सटाइल मिलों को सकल जमा पूंजी निवेश में 40 फीसदी से 10 फीसदी तक पूंजीगत सब्सिडी । इसकी अधिकतम सीमा 150 करोड़ रुपए। मशीनरी खरीदने के ऋण पर 5 से 7 फीसदी ब्याज सब्सिडी। निजी एवं अविकसित शासकीय भूमि पर इकाई लगाने पर बिजली, पानी और सड़क विकास के लिए एक करोड़ रुपए की बुनियादी विकास सहायता। विनिर्मित वस्त्र क्षेत्र में भी सरकार की ओर से रोजगार सहायता के रूप में 5 वर्ष तक 5,000 रुपए प्रति कर्मचारी प्रतिमाह की राशि देने, कर्मचारियों के कौशल विकास के लिए 13,000 रुपए प्रति कर्मचारी की आर्थिक सहायता देने तथा कपड़ा और वस्त्र दोनों इकाइयों को बिजली बिल में राहत। निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए औद्योगिक नीति में उनके बुनियादी सहायता के 20 प्रतिशत तक अतिरिक्त प्रोत्साहन का प्रावधान है। ज्यादा रोजगार तैयार करने वाली इकाइयों को 50 प्रतिशत तक अधिक का प्रोत्साहन।