भागवत बोले- लिंचिंग के नाम पर किया जा रहा भारत को बदनाम

भागवत बोले- लिंचिंग के नाम पर किया जा रहा भारत को बदनाम

नागपुर विजयादशमी के मौके पर मंगलवार को नागपुर स्थित संघ मुख्यालय में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने शस्त्र पूजा की। स्वयंसेवकों ने पथ संचलन किया। इस दौरान भागवत ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटाकर सरकार ने साबित किया कि वह कठोर निर्णय लेने के लिए प्रतिबद्ध है। लिंचिंग को लेकर उन्होंने कहा कि यह शब्द पश्चिमी देशों से हमारे यहां आया और हम पर थोपा जा रहा है। इसे लेकर भारत को दुनिया में बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। मोहन भागवत ने कहा कि संघ का नाम लिंचिंग की घटनाओं से जोड़ा गया, जबकि संघ के स्वयंसेवकों का ऐसी घटनाओं से कोई संबंध नहीं होता। मॉब लिंचिंग पर कड़े कानून बनाए जाने चाहिए। इस मौके पर मुख्य अतिथि के तौर पर एचसीएल के संस्थापक शिव नाडर, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस मौजूद रहे।

भारत के हिंदू राष्ट्र होने को लेकर संघ अडिग : वहीं भागवत कहा कि संघ अपने इस नजरिये पर कायम है कि 'भारत एक हिंदू राष्ट्र' है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के वैभव और शांति के लिये काम कर रहे सभी भारतीय 'हिंदू' हैं।

कुछ स्वार्थी लोग नहीं चाहते भारत की मजबूती: भागवत ने कहा कि अच्छी अर्थ नीतियां और सरकार के लोगों के बयानों का स्वार्थी लोगों द्वारा गलत चीजों का लाभ उठाने के लिए दुरुपयोग किया जाता है। ये लोग नहीं चाहते कि भारत मजबूत और जीवंत हो। हमें इनकी पहचान करने में सतर्क रहना चाहिए और उन्हें बौद्धिक, सामाजिक स्तरों पर काउंटर करना चाहिए।

वैश्विक अर्थव्यवस्था की सुस्ती का हर जगह प्रभाव:संघ प्रमुख ने कहा कि आर्थिक क्षेत्र पर चिंताओं के बारे में उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की सुस्ती ने हर जगह अपना प्रभाव छोड़ा है।

 शिव नाडर बोले, सरकार अकेले नहीं कर सकती समस्याओं का समाधान

वहीं कार्यक्रम में एचसीएल के चेयरमैन शिव नाडर ने देश में मौजूद चुनौतियों को लेकर कहा कि मौजूदा समय में देश तमाम तरह की चुनौतियों से गुजर रहा है लेकिन इन तमाम समस्याओं का सरकार अकेले ही समाधान नहीं कर सकती। उन्होंने कहा, निजी क्षेत्रों, नागरिकों और एनजीओ को भी देश के सामने खड़ी चुनौतियों से निपटने में योगदान देना होगा। उन्होंने कहा कि पिछले कई दशकों तक हमने पोलियो, स्माल पॉक्स, भूख, अशिक्षा, बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं आदि से संघर्ष किया। इन समस्याओं के समाधान के लिए सभी हितधारकों को प्रयास करना होगा, इसमें निजी क्षेत्र और नागरिकों की समान सहभागिता जरूरी है।