स्मार्ट कार्ड के लिए स्वीकृत हुए 40 लाख, समय पर काम न करने वाली एजेंसी बदली

स्मार्ट कार्ड के लिए स्वीकृत हुए 40 लाख, समय पर काम न करने वाली एजेंसी बदली

जबलपुर   शहर में नियम विरुद्ध धमाचौकड़ी मचा रहे आॅटो के खिलाफ दायर मामले में सोमवार को सरकार ने पूर्व आदेश के परिपालन में अपना जवाब पेश किया। एक्टिंग चीफ जस्टिस आरएस झा व जस्टिस व्हीके शुक्ला की युगलपीठ के समक्ष सरकार की ओर से बताया गया कि आटो की धमाचौकड़ी रोकने ठोस प्रयास किए गए हैं, जिसके लिए स्मार्ट कार्ड खरीदने के लिए 40 लाख रुपए की स्वीकृति दे दी गई है। इसके साथ ही न्यायालय को बताया गया कि पहले नियुक्त एजेंसी द्वारा समय पर कार्य न किए जाने पर उसे बदलकर दिल्ली की दूसरी एजेंसी को नियुक्त कर दिया गया है, जिसे काम पूरा करने के लिए एक माह की समय-सीमा दी गई है। उक्त जवाब के बाद न्यायालय ने मामले की सुनवाई एक सप्ताह के लिए मुलतवी कर दी है।

हमेशा बना रहता है जान का खतरा

उल्लेखनीय है कि सतना बिल्डिंग निवासी सतीश वर्मा व नागरिक उपभोक्ता मार्ग दर्शक मंच की ओर से दायर याचिकाओं में शहर की सड़कों पर नियम विरुद्ध तरीके से धमाचौकड़ी मचा रहे आटो के संचालन को चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया था कि आटो न सिर्फ शहर की यातायात व्यवस्था बिगाड़ रहे हैं, बल्कि इस हद तक सवारियों को बैठाते हैं कि हमेशा उनकी जान का खतरा बना रहता है। ऐसे आटो शहर की सड़कों को हाई स्पीड पर चलते हुए आसानी से देखे जा सकते हैं, जिन्हें सड़क पर चलने वाले लोगों की जान की परवाह ही नहीं होती।

3 की जगह बैठाते हैं 15 सवारी

आवेदक का आरोप है कि शहर की सड़कों पर धमाचौकड़ी मचाने वाले आॅटो के संचालन को लेकर कई बार सवाल उठे, लेकिन प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। नियम विरुद्ध तरीके से आॅटो की धमाचौकड़ी का ङ्मीम बदस्तूर जारी है। इतना ही नहीं नियमानुसार तीन सवारी बैठाने का प्रावधान है, लेकिन 15 सवारी बैठायी जा रहीं है, इसके साथ ही पूर्व आदेश के परिपालन में न तो मीटर लगे हैं और न ही किराया सूची। इस संबंध में रोजाना ही अखबारों में खबरें प्रकाशित हो रहीं हंै, हर दूसरे दिन ट्रैफिक जाम की स्थिति निर्मित हो रहीं हैं।