साढ़े 4 सौ करोड़ से चल रहे स्मार्ट सिटी के 33 प्रोजेक्ट, एक फीसदी भी पूरे नहीं

साढ़े 4 सौ करोड़ से चल रहे स्मार्ट सिटी के 33 प्रोजेक्ट, एक फीसदी भी पूरे नहीं

जबलपुर ।   साल पहले गठित हुई जबलपुर स्मार्ट सिटी लि. में इस वक्त 445 करोड़ के 33 प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इनमें से बामुश्किल 1 फीसदी भी प्रोजेक्ट पूरे नहीं हो पाए हैं। वादा तो ये किया गया था कि 5 साल में 4 हजार करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट शहर में नजर आएंगे। 10 फीसदी काम ही शुरू किए गए इसमें भी प्राय: सभी बड़े प्रोजेक्ट अधूरे हैं। देश के 100स्मार्ट शहरों में शुमार होने वाला जबलपुर स्वच्छता में जागरूकता से लेकर अन्य विकास कार्यों में धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। केन्द्र सरकार ने अपने हिस्से के पैसे भी दे दिए हैं वहीं राज्य सरकार ने भी अपने हिस्से की राशि दे दी है। अफसोस की बात यह है कि जिन अधिकारियों पर काम करवाने की जवाबदारी है वे बिना उचित प्लानिंग के काम करवा रहे हैं। यही वजह है कि कोई भी असरदार बड़ा प्रोजेक्ट 3 सालों में नजर नहीं आ रहा है। धीमी गति से काम करने के कारण और वांछित प्रोग्रेस न दिखाने के कारण 10 स्थान से यह अब 60 वें रैंकिंग पर पहुंच चुका है।

एरिया बेस्ड काम अधूरे

स्मार्ट सिटी के लिए शहर में 755 एकड़ की जगह तय की गई थी जो कि राईट टाउन,नेपियर टाउन,गोलबाजार,रानीताल का हिस्सा थी। इसके अलावा एरिया बेस्ड काम भी चालू किए गए थे जिसमें स्मार्ट रोड,फुटपाथ आदि के काम थे। इनमें से कोई भी काम अभी तक कंपलीट नहीं हो पाई है।

समयसीमा का नहीं ध्यान

अधिकारियों ने प्रोजेक्टों की समय सीमा तो तय की ली मगर मॉनीटरिंग और दूसरी दिक्कतों के कारण इन्हें टाइम पर पूरा नहीं करवा पाए। सभी प्रोजेक्टों में यही हाल है। यहां तक कि जहां कम से कम 5 स्मार्ट रोड तैयार हो जानी थीं तो एक ही रोड तैयार हुई है उसमें भी अभी कुछ काम बाकी है।

प्रयोग दर प्रयोग

शहर को प्रयोगशाला के रूप में तब्दील करने के लिए जाने जाने वाली स्मार्ट सिटी बदनाम हो चुकी है। इकलौती स्मार्ट रोड को बनाने में 3 साल का वक्त लगना और इसमें बार-बार संशोधन करने से आगे की स्मार्ट रोड बनने पर संशय खड़ा हो गया है। पहले 80 फीट फिर 60 फीट चौड़ाई मेंर बनाने के निर्णय की आलोचना हुई है।

डोर टू डोर कचरा प्रबंधन सफल नहीं

कचरे से बिजली बनाने के संयंत्र,डोर टू डोर कचरा कलेक्शन सिस्टम ने अपेक्षित काम नहीं किया। कचरे को लेकर लगातार हो रही आलोचना ने स्मार्ट सिटी प्रबंधन की छवि को खासा नुकसान पहुंचाया है। पांच गुना ज्यादा पैसे देने के बा वजूद संबंधित कंपनी ने स्मार्ट वर्किंग नहीं दिखाई।

ये हैं जारी प्रोजेक्ट

24 घंटे वाटर सप्लाई पायलट प्रोजेक्ट,मल्टी स्पोर्टस कॉम्प्लेक्स, डुमना नेचर पार्क डेवलपमेंट, कन्वेंशन सेंटर घंटाघर, इंटेलीजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट,स्मार्ट रोड फेज-1 यूटिलिटी डक्ट,स्मार्ट रोड फेज-2,स्मार्ट रोड गोकलपुर से घमापुर, फुटपाथ निर्माण व सौंदर्यीकरण, एमआर-4 दमोहनाका आईटीआई, साईकिल ट्रैक कॉरीडोर,डिजिटल लाइब्रेरी टाउन हाल,कन्वेंशन सेंटर घंटाघर, एनएमटी फेज-2 मेट्रो स्टैंड से घंटाघर,एनएमटी फेज-2 बसस्टैंड से मदनमहल,रोड साइड स्मार्ट पार्किंग,कमांड एंड कंट्रोल सिविल वर्क,प्लेस मेकिंग एंड विजुअल इंप्रूवमेंट,डिजाइन एंड डेवलपमेंट जंक्शन,इंक्यूवेशन सेंटर उद्योग भवन, कंजरवेशन वर्क कमानिया गेट,रोड सेफ्टी ऑडिट एंड आईडेंटीफिकेशन ब्लेक स्पॉट,जंक्शन इंपू्रवमेंट,सिटी ब्रांडेड एंड रिलेटिड इवेंट,पब्लिक ईसाईकि ल,इंटीमेटिड थिएटर भंवरताल,डुमना नेचर रिजर्व में विकास कार्य,रिवर फं्रट इवेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन,कंजरवेशन वर्क गांधी लाइब्रेरी,कंजरवेशन वर्क संग्राम सागर,कमांड एंड कंट्रोल सेंटर हार्डवेयर,सॉμटवेयर वर्क।