राजकोषीय घाटा रोकने में जीएसटी सहायक

राजकोषीय घाटा रोकने में जीएसटी सहायक

नई दिल्ली। डायरेक्ट टैक्स कलेक्शंस में कमी के कारण वित्त वर्ष 2019 में राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.4 प्रतिशत तक रोकने का लक्ष्य हाथ से फिसलता दिख रहा था, लेकिन ऐसा लग रहा है कि खर्च में बचत और जीएसटी कलेक्शन ने ऐसा होने से बाल-बाल बचा लिया। सरकार ने सोमवार को जो आंकड़ा जारी किया, उससे पता चला कि मार्च में जीएसटी कलेक्शन 1.07 लाख करोड़ रुपये रहा। यह जुलाई 2017 में इसके लागू होने के बाद सबसे ज्यादा कलेक्शन है। सालाना संग्रह 11.77 लाख करोड़ रुपये रहा है। पहली फरवरी को पेश किए गए अंतरिम बजट में इसका संशोधित अनुमान घटाकर 11.47 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया था। एक टॉप गवर्नमेंट आॅफिसर ने कहा, 'कई चीजों पर जीएसटी रेट्स में कमी की गई थी। अगर वैसा नहीं किया गया होता तो जीएसटी कलेक्शन और ज्यादा हो सकता था। ज्यादा कलेक्शन से डायरेक्ट टैक्स में कमी की कुछ भरपाई करने में मदद िम् ा ल् ा े ग् ा ी । डायरेक्ट टैक्स क ल् ा े क् श् ा न् ा 11.5 लाख करोड़ रुपये के बजटीय अनुमान के आसपास रह सकता है। इसमें मार्च के अंत में प्राय: अपनाई जाने वाली टैक्टिक्स से मदद मिलेगी, जिसके तहत टैक्स अधिकारियों ने सरकारी बैंकों से कहा था कि वे अप्रैल के बजाय मार्च में ही टीडीएस जमा करें। वित्त वर्ष 2019 के लिए संशोधित अनुमान में सरकार ने डायरेक्ट टैक्स का टारगेट 11.5 लाख करोड़ से बढ़ाकर 12 लाख करोड़ रुपये कर दिया था। संशोधित अनुमान के मुकाबले इसमें करीब 60,000 करोड़ रुपये की कमी रह सकती है। डायरेक्ट और इ न् ा ड ा य् ा र े क् ट टैक्स, दोनों मोर्चों पर आखिरी लम्हों में लगाए गए जोर से कलेक्शन बढ़ने से वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने भरोसा जताया कि राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 3.4 प्रतिशत पर रोकने का लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा। फरवरी के अंत में राजकोषीय घाटा पूरे वित्त वर्ष 2019 के लिए इसके टारगेट से 34.2 प्रतिशत बढ़ गया था। इससे लगा था कि इसे जीडीपी के 3.4 प्रतिशत तक नहीं रोका जा सकेगा। ऐसा लग रहा है कि सरकार ने बजटीय लक्ष्य हासिल करने के लिए खर्च में भी कमी की है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि जीएसटी कलेक्शंस में बढ़ोतरी से मैन्युफैक्चरिंग और कंजम्पशन की ग्रोथ का पता चल रहा है। उन्होंने कहा, मार्च 2019 में जीएसटी कलेक्शन रेकॉर्ड 1,06,577 करोड़ रुपये होने से मैन्युफैक्चरिंग और कंजम्पशन, दोनों में ग्रोथ का संकेत मिल रहा है। वित्त वर्ष 2019 के दौरान जीएसटी रेवेन्यू का मंथली एवरेज 98114 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2018 के लेवल से 9.2 प्रतिशत ज्यादा था। कस्टम्स और सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी सहित टोटल इनडायरेक्ट कलेक्शन का टारगेट 10.32 लाख करोड़ रुपये का था और यह हासिल हो गया है। वित्त वर्ष 2019 की आखिरी तिमाही के लिए जीएसटी कलेक्शन सालभर पहले से 14.3 प्रतिशत ज्यादा रहा। मार्च में बढ़ोतरी के कारण ऐसा हुआ।